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दिल्ली में 2018 के सड़क हादसों में मरने वाले 45% लोग पैदल यात्री : ट्रैफिक पुलिस

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कुल 1657 हादसों में से 150 हरियाणा रजिस्ट्रेशन वाले वाहनों से हुए हैं. रिपोर्ट में ये भी है कि 743 हादसे दिन में हुए हैं, वहीं 914 में हुई हैं.

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रिपोर्ट में ये भी है कि 743 हादसे दिन में हुए हैं, वहीं 914 में हुई हैं

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने राजधानी में 2018 के रोड हादसों की डेटा लिस्ट जारी की है जिसमें सामने आया है कि 2017 में सड़क हादसों में हुई 1584 मौतों के मुकाबले 2018 में 1690 लोगों की जान गई है. इस रिपोर्ट में सामने आया है कि 2018 में दिल्ली में कुल 6515 दुर्घटनाएं हुईं जिनमें 6086 लोग घायल हुए, वहीं 1690 लोगों ले अपनी जान गंवा दी. हादसों में जान गंवाने वालों में 6.69% की बढ़ोतरी हुई है और कुद हादसों की संख्या में 2.36% की कमी आई है. 2018 में हुए हादसों में मरने वाले सबसे ज़्यादा लोग पैदल यात्री थे जो कुल संख्या में 45.86% हैं. इसके बाद स्कूटर और दो-पहिया वाहन चालक आते हैं जिनकी मौत का प्रतिशत 33.72 है.

2009 के मुकाबले हादसों में हुई मौत का आंकड़ा भले ही कम हो लेकिन पिछले साल ये ट्रेंड वापस आ गया है जिसमें बाकी राज्यों से आए वाहनों से दिल्ली में हादसों की संख्या बहुत बढ़ गई है. कुल 1657 हादसों में से 150 हरियाणा के रजिस्ट्रेशन वाले वाहनों से हुए हैं. रिपोर्ट में ये भी सामने आया है कि 743 हादसे दिन में हुए हैं, वहीं 914 दुर्घटनाएं रात में हुई हैं. इसके अलावा ट्रैफिक विभाग ने 110 छेत्रों की पहचान की है जो दुर्घटना संभावित छेत्र हैं. इसके साथ ही रिंग रोड, आउटर रिंग रोड, जीटी करनाल रोड, रोहतक रोड और ग्रैंड ट्रंक रोड के खतरनाक स्ट्रेचेस की पहचान की है.

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2018 में कार/टैक्सी की वजह से 253 भयंकर दुर्घटनाएं हुई थीं जो 15.26% था और ये किसी एक प्रकार के वाहन द्वारा हुई सबसे ज़्यादा दुर्घटनाएं हैं.

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