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कोरोनोवायरस: सरकार ने ऑटोमोबाइल कंपनियों को वेंटिलेटर बनाने के लिए कहा

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि ऑटोमोबाइल निर्माताओं ने कोरोनावायरस महामारी का सामना करने के लिए वेंटिलेटर बनाने शुरू कर दिए हैं

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महिंद्रा पहले से ही एक वेंटिलेटर प्रोटोटाइप के साथ आ चुका है

कोरोनावायरस बीमारी से लड़ना आसान काम नहीं है और केंद्र सरकार आवश्यक उपकरणों को जल्द से जल्द उपलब्ध कराने में सभी संभव संसाधनों का उपयोग कर रही है. इस बीमारी के चलते ऑटोमोबाइल कंपनियों को अपने प्लांट्स में उत्पादन बंद करना पड़ा है. अब स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा किए गए आहवान का जवाब देने के लिए ऑटो कंपनियों ने कमर कस ली हे तथा वेंटिलेटरों का निर्माण करके और उन्हें उपयोग के लिए जल्द से जल्द उपलब्ध कराने के की दिशा में काम शुरू कर दिया है. मंत्रालय का कहना है कि जल्द ही आपूर्ति शुरू होने की उम्मीद है.

भारत के कुछ सबसे बड़े ऑटोमोबाइल निर्माताओं ने पिछले कुछ दिनों में कोरोनावायरस से लड़ने के लिए वेंटिलेटर और अन्य उपकरण उपलब्ध कराने की अपनी योजना को पहले ही साझा कर दिया है. जबकि महिंद्रा पहले से ही एक वेंटिलेटर प्रोटोटाइप के साथ आ चुका है मारुति सुजुकी ने भी हर महीने लगभग 10,000 वेंटीलेटर बनाने के लिए एक स्वास्थ्य कंपनी के साथ काम शुरू कर दिया है. साझेदार अगवा हेल्थकेयर, नोएडा की अप्रैल के दूसरे सप्ताह में सरकार को आपूर्ति शुरू करने की उम्मीद है. टाटा मोटर्स की मूल कंपनी, टाटा संस ने भी COVID-19 या कोरोनावायरस के खिलाफ लड़ाई में 1000 करोड़ रु के भारी योगदान की घोषणा की है, जिसमें से कुछ राशि का उपयोग वेंटीलेटर बनाने के लिए किया जाएगा. बजाज ऑटो और टीवीएस मोटर कंपनी जैसे बाइक निर्माताओं ने भी बीमारी से निपटने के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया है.
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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह भी साझा किया है कि यह 14,000 से अधिक मौजूदा वेंटिलेटर के अतिरिक्त होगा जो देश के विभिन्न अस्पतालों में Covid19 रोगियों के लिए रखे गए हैं. इस के अलावा भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, जो रक्षा मंत्रालय के तहत 9 पीएसयू में से एक है, उसको भी स्थानीय निर्माताओं के साथ मिलकर अगले दो महीनों में 30,000 वेंटिलेटर बनाने का काम सौंपा गया है.