भारत में अगर कोई व्यक्ति 1 लाख या 5 लाख की नंबरप्लेट खरीदे तो उसे बड़ी बात समझा जाता है. अपनी कार में बेहतरीन नंबर वाली प्लेट के लिए कई लोग इससे भी ज़्यादा कीमत खर्च करते हैं. लेकिन जब विदेशों में कार की वीआईपी नंबरप्लेट की बात आती है तो यह रकम इतनी हो जाती है जितना हम खर्चने का सोच भी नहीं सकते. यूनाइटेड किंगडम में आधिकारिक रूप से ‘F1’ नंबर को बेचने के लिए पेश किया गया है जिसकी कीमत 132 करोड़ रुपए रखी गई है. F1 नंबर अब शान की बात हो चुका है और इसे मर्सडीज़-मैक्लेरेन एसएलआर, कस्टम रेन्ज रोवर और बुगाटी वेरॉन जैसी कारों पर लगाया गया है. इससे पहले 2008 में 4 करोड़ रुपए की यह प्लेट्स बिकी थी जो 1904 से ऐक्सेस सिटी काउंसिल के मालिकाना हक में थीं.

F1 नंबर की इस प्लेट के फिलहाल मालिकाना हक रखने वाले अफज़ल खान कारों को कस्टमाइज़ करने की स्पेशलाइज़्ड फर्म खान डिज़ाइन के मालिक हैं. फॉर्मुला वन का छोटा नाम F1 होता है और यूनाइटेड किंगडम के साथ दुनियाभर में इस नंबर को काफी पसंद किया जाता है. इसके साथ ही इसके इतने महंगे होने का कारण इसका सिर्फ 2 अंकों में होना है. अगर ये बिक जाती है तो ये दुनिया की सबसे महंगे दाम पर बिकने वाली नंबरप्लेट हो जाएगी. अबतक यह रिकॉर्ड दुबई में बिकी डी5 प्लेट के नाम दर्ज है जो 67 करोड़ रुपए में बिकी थी और इसके खरीददार भारत के बलविंदर साहनी हैं.
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इस सबके बाद भी भारत में कस्टमाइज़ नंबरप्लेट का कोई प्रावधान नहीं है, यहां आप सीधे आरटीओ से स्पेशल नंबर वाली कोई भी प्लेट खरीद सकते हैं. दुपहिया वाहनों के लिए 5,000-50,000 रुपए में रेन्ज में नंबर उपलब्ध हैं, वहीं चार पहिया वाहनों के लिए ये रेन्ज 15,000 रुपए से 1 लाख रुपए के तक है. अगर दो खरीददार अधिकतम राशी देने के तैयार हैं तो ऐसी स्थिति में बोली लगाई जाती है. हमें लगता है कि सभी देशों की तरह भारत में भी कस्टमाइज़ नंबर्स दिए जाने चाहिए जिसमें F1 जैसे ही अल्फान्यूमैरिक नंबर्स दिए जाने चाहिए जैसा कि विदेशों में लंबे समय से किया जा रहा है.









